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कर प्रीत मैने तुमसे

 कर प्रीत मैंने तुमसे सपना साकार कर लिया है, मेरे प्रभु ने मुझ पर बड़ा उपकार कर दिया है। तेरी मुस्कान से महका मेरे हृदय का कोमल उपवन, पाकर तेरा प्रेम मैंने जीवन गुलज़ार कर लिया है। तेरी आँखों में जब-जब मैंने अपना संसार देखा, हर दुआ में बस तेरा ही स्नेह अपार देखा। माँगा था जिसे बरसों से मैंने अपने प्रभु से, तुझमें ही उस हर प्रार्थना का साकार रूप देखा। ✍️ इंजीनयर राजन सोनी

तुम मनाना प्रिए

 प्रेम हो गर तो उसको निभाना प्रिए, प्रीत के पृष्ठ पर ख्वाब सजाना प्रिए, रूठ जाऊ गर मैं तो किसी बात पर, अंक में अपने लेकर तुम मनाना प्रिए।। इंजीनियर राजन सोनी

वादा

 प्रेम की डोर मै तोडूंगा नहीं, साथ राधिके का मैं छोड़ूंगा नहीं, कर विश्वास मुझ पर जो बैठी है वो, वादा करता हूं कभी उससे मुख मोड़ूगा नहीं।। इंजीनियर राजन सोनी  अम्बेडकर नगर, उत्तर प्रदेश

प्रीत

  प्रीत ऐसा कहा जो किया जा सके, अपनी उलझन किसी को दिया जा सके, खुद ही जलते रहो इसमें उम्र भर, प्रेम पीड़ा ऐसा कहा जो सहा जा सके।। इंजीनियर राजन सोनी 

कोई संग नहीं है

 ठहरी सी जिंदगी में अब कोई रंग नहीं है, भटक रहा हूं अकेला कोई संग नहीं है, अपने होने का वादा तो यहां सब कर रहे, परख कर देखा जो तो कोई अपना नहीं है।। इंजीनियर राजन सोनी

हिंदी की महिमा

 हिंदी की तुम विधा को देखो, कितनी मन को भाती है। गद्य–पद्य में आकर देखो, सबके मन को छू जाती है। भारत माता है इसकी जननी, और यहीं से यह पोषण पाती है। हवा से बहती हुई देखो, भारत की खुशबू फैलाती है। अपनी विविध कला को दिखलाकर, जन-जन के मन को लुभाती है। जो भी इसको धारण करता, फिर बस उसी की हो जाती है। प्रेम पुलकित हो उठता तन-मन, इसकी एक बूँद मिल जाने पर। सोचो कितना आनंद मिलेगा, हिंदी मंच पे चढ़ जाने पर। पर इसकी अनुपम लीला देखो, कभी न खुद पर इठलाती है। अनंत लोग हों गर विह्वल तो भी, सबको मस्त मगन कर जाती है। हिंदी की तुम विधा को देखो, कितनी मन को भाती है। — इंजीनियर राजन सोनी अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश

बड़ी मुश्किल से पाया हूँ

 बड़ी मुश्किल से पाया हूँ, तुम्हें अब खो नहीं सकता। तुम्हारा हो गया हूँ अब, किसी का हो नहीं सकता। मेरे हृदय में तो बस, तुम्हारा ही रूप बसता हैं। निकल जाओ तुम मेरे दिल से, कभी ये हो नहीं सकता।। - इंजीनियर राजन सोनी