संदेश

हमारा नहीं हुआ Er. Rajan Soni

 उसने ये सोचा कि अब शख़्स ये हमारा नहीं हुआ, जिसे अपना समझा था, वो हमारा नहीं हुआ। हम तो उम्रभर उसके साथ चलने को तैयार थे, मगर उसके दिल में कभी हमारा बसेरा नहीं हुआ।। ✍️इंजीनियर साहब

अभियंता दिवस (इंजीनियर्स डे विशेष) Er. Rajan Soni

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  पहले पैदल चलते थे, पहिए की खोज किया अभियंता ने। मिट्टी वाला घर थे जितने, उसको महल बनाया अभियंता ने। हल, कुदाल से खेती करते, तनिक देर भी चैन की सांस न लेते। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, और थ्रेसर का आविष्कार किया अभियंता ने।  हाथों से कपड़े बुनते थे, एक ही रंग में सनते थे,  हथकरघा और विभिन्न यंत्रों को ढूंढ निकाला अभियंता ने। पंखा, कूलर, फ्रिज और टीवी, विभिन्न प्रकार के यन्त्र जो हैवी, जल, थल को खंगाल रहे जो, आवश्यकताओं को साकार रहे वो, दूरदर्शन और संगणक का भी अविष्कार किया अभियंता ने।  चिट्ठी का इंतज़ार था लंबा, संदेशों का जाल बिछाया अभियंता ने।  सात समुंदर पार की बात को, पल भर में पहुँचाया अभियंता ने। नदियों पर पुल सजाए, ऊँची मीनारें बनाई, धरती से अंबर तक का फासला घटाया अभियंता ने।  राष्ट्र के नव-निर्माण में अपना सर्वस्व लगाया, विकसित भारत का सपना साकार किया अभियंता ने। ✍️ इंजीनियर राजन सोनी  अम्बेडकर नगर, उत्तर प्रदेश

हिंदी कितनी प्यारी है Er. Rajan Soni

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 हिंदी कितनी प्यारी है हिंदी कितनी प्यारी है, हिंद की राज दुलारी है। सबके मन को मोहने वाली, दुःख-संताप को धोने वाली। मीठी इसकी बोली है, मन की ये हमजोली है। भावों को स्वर देने वाली, रिश्तों में रस घोलने वाली। माँ की ममता जैसी लगती, गंगा की निर्मल धारा है। भारत की पहचान बनी ये, जन-जन की आवाज़ हमारी है। तुलसी, कबीर की वाणी है, भारत की अमर कहानी है। ज्ञान-विज्ञान सजाने वाली, विश्व-पटल पर छाने वाली। आओ इसका मान बढ़ाएँ, हिंदी को सम्मान दिलाएँ। हिंदी केवल भाषा नहीं, यह माँ भारती की शान है।  हिंदी है तो भाव हैं, हिंदी है तो संस्कार हैं। हिंदी से ही हिंदुस्तान, हिंदी से ही हम सबकी पहचान है।  ✍️ इंजीनियर राजन सोनी  अम्बेडकर नगर, उत्तर प्रदेश

AI से 80 का दशक Er. Rajan Soni

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 AI से अस्सी के दशक का फोटो तो बनवा लोगे तुम, पर उस दौर की इंसानियत कहाँ से लाओगे तुम? AI से अस्सी के दशक का पहनावा तो अपना लोगे तुम, पर उस दौर की सादगी कहाँ से लाओगे तुम? मिट्टी के आँगन, कच्चे घर फिर से बना लोगे तुम, पर उन आँगनों का अपनापन कहाँ से लाओगे तुम? चौपालों की तस्वीरें AI से खूब सजा लोगे तुम, पर चौपालों वाली वो आत्मीयता कहाँ से लाओगे तुम? पड़ोसी के सुख में खुश, दुःख में साथ निभा लोगे तुम, पर बिना स्वार्थ के रिश्ते कहाँ से लाओगे तुम? रेडियो, कैसेट और पुराने गीत फिर बजा लोगे तुम, पर साथ बैठकर सुनने का वो सुकून कहाँ से लाओगे तुम? पुराने रिश्तों की तस्वीरें तो फिर बना लोगे तुम, पर रिश्तों में वो गर्माहट कहाँ से लाओगे तुम? बचपन की गलियों का दृश्य फिर दिखला दोगे तुम, पर उन गलियों की वो मासूमियत कहाँ से लाओगे तुम? AI से बीता हुआ ज़माना फिर से बना लोगे तुम, हर चीज़ का पुराना रंग भी सजा लोगे तुम। मगर याद रखना—सिर्फ तस्वीरों से दौर नहीं लौटता, वो दौर बनाने वाला इंसान कहाँ से लाओगे तुम? चेहरे, कपड़े, घर और गलियाँ तो बना लोगे तुम, पर उस दौर जैसा दिल कहाँ से लाओगे तुम?” ✍️ इंजीनियर रा...

हमने भी उनकी होशियारिया देखी है Er. Rajan Soni

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  हमने भी उनकी होशियारियाँ देखी हैं, हर बात में उनकी अदाकारियाँ देखी हैं। समझते रहे वो हमें नादान उम्रभर, हमने भी उनकी सारी तैयारियाँ देखी हैं। हम चुप रहे तो इसे कमजोरी समझ बैठे, हमने उनकी आँखों की मक्कारियाँ देखी हैं। वो समझे कि हमें खबर ही नहीं उनकी चालों की, हमने तो उनकी हर एक गद्दारियाँ देखी हैं। वक़्त आने पर हिसाब देना पड़ेगा, हमने खामोशी में भी समझदारियाँ देखी हैं। आज जो अपनी होशियारी पर इतराते हैं, हमने कल उनकी हार की तैयारियाँ देखी हैं। ✍️ इंजीनियर राजन सोनी

शीशे पार का इन्सान Er. Rajan Soni

​शीशे पार का इंसान ​तुमने जो भेजा है लाल रंग का इमोजी, वह मेरी स्क्रीन पर चमकता तो है, पर मेरी हथेली को गर्म नहीं करता। ​हम एक ऐसी दुनिया में आ गए हैं, जहाँ शब्द तैरते हैं, लेकिन उनकी सुगंध हवा में गायब है। ​हमने पिक्सेल में तलाश ली है दुनिया, और भूल गए हैं— कि किसी हथेली का पसीना दूसरी हथेली की घबराहट चुरा लिया करता था। ​एक 'नोटिफिकेशन' कभी किसी के अचानक घर आ जाने की धड़कन नहीं बन सकता, और 'वॉइस नोट' की लहरें कभी कांपते हुए होंठों की चुप्पियों को नाप नहीं सकतीं। ​हमने तस्वीरें संभाल कर रखी हैं, लेकिन उस छुअन की यादें कहाँ हैं, जो बिना किसी आवाज़ के रूहे-शरीर के सारे ज़ख्म सिल दिया करती थी? ​काँच का यह पर्दा कितना भी  साफ़ हो, यह दो आत्माओं के बीच एक अभेद्य दीवार है। ​अगर सच में महसूस करना है मुझे, तो इस स्क्रीन को बुझा दो। अपनी उंगलियों से नहीं, अपनी मौजूदगी से मुझे छुओ— क्योंकि परमात्मा ने इंसान को मिट्टी का बनाया था, काँच का नहीं। ✍️इंजीनियर राजन सोनी ✍️Er. Rajan Soni 

प्रजा हुई दुखारी है Er. Rajan Soni

 अब प्रजा हुई दुखारी है, राजा की मति मारी है। मंत्रिमंडल हुक्म चलाता है, राजा को इशारे पर नचाता है। त्राहिमाम अब मचा हुआ है, धन-दौलत कुछ न बचा हुआ है। सबके जीवन पर संकट छाया, ये कैसा बंधन आया है? महँगाई ने कमर तोड़ दी, भूख ने हर उम्मीद छोड़ दी। मेहनत करने वाला रोता है, सुख का सपना दूर ही होता है। सिंहासन पर बैठे हैं राजा, पर शासन पर किसका है कब्जा? नीति बने बंद कमरों में, जनता पिसती है गलियारों में। जो सच बोले, वह दोषी ठहरे, जो चुप बैठे, उसके दिन बहरे। न्याय अगर बिकने लग जाए, तो लोकतंत्र भी क्या बच पाए? प्रजा पुकारे—सुनो महाराज, मत करो जनता से कपट आज। राजा वही जो दुख को जाने, प्रजा के आँसू अपने माने। जिस दिन जनता जाग जाएगी, हर झूठी दीवार गिराएगी। सत्ता चाहे जितनी भारी हो, जनता सबसे बड़ी सवारी हो। इंजीनियर राजन सोनी अम्बेडकर नगर उत्तर प्रदेश