जिंदगी Er. Rajan Soni
देखता हूं ए जिंदगी ,
तू मुझको कितना गिराएगी ।
ऐसा तो कभी समय आएगा,
जब तू मुझको ऊपर उठाएगी।
हार नहीं मानूंगा तुझसे और तेरी
इन परिस्थितियों से।
तू मुझे कब तक इन कटीले,
पथों पर दौड़ाएगी।
तू जितना सोचती है,
मैं उतना तो कमजोर नहीं ।
क्यों इतराती है इतना,
तेरी छाया तो चहु ओर नहींl
तुझ में कहां है इतनी हिम्मत,
जो तू मेरी हस्ती मिटाएगी।
देखता हूं ऐ जिंदगी,
तू मुझे कितना गिराएगी।
*इंजी.राजन सोनी*
*अम्बेडकर नगर,उत्तर प्रदेश*
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