अनपढ़ी कहानी Er. Rajan Soni


जिसे पढ़ ना सका कोई आज तक , मैं वह अनपढ़ी कहानी हूं । 

कल कल करती इन नदियों की , धाराओं में बहता पानी हूं।

वीरों के लहू से सिंचित, 

भारत माता ओढ़े हैं जिसको, 

मैं वह चूनर धानी हूं।

कबीर,नानक और दादू जैसे संतों का

में गूँजता अमृतवाणी हूं।

थोड़ा सा स्वाभिमानी हूं ,

थोड़ा सा अभिमानी हूं

 गर्व मुझको कि मैं भी एक हिंदुस्तानी हूं।

पढ़ ना सका जिसे कोई आज तक 

मैं वह अनपढ़ ही कहानी हूं।


इंजी.राजन सोनी "निर्मय"

अम्बेडकर नगर,उत्तर प्रदेश

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