बरसात Er. Rajan Soni
हुई बरसात सावन में, उमंगें खिल गईं फिर से,
बुझी-सी थी जो दिल में, वो तरंगें मिल गईं फिर से।
घटा छाई, फुहारें आईं, महक उठा ये सारा मन,
पुरानी यादों की गलियों में, खुशियाँ मिल गईं फिर से। 🌧️
✍️इंजीनियर राजन सोनी
हुई बरसात सावन में, उमंगें खिल गईं फिर से,
बुझी-सी थी जो दिल में, वो तरंगें मिल गईं फिर से।
घटा छाई, फुहारें आईं, महक उठा ये सारा मन,
पुरानी यादों की गलियों में, खुशियाँ मिल गईं फिर से। 🌧️
✍️इंजीनियर राजन सोनी
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