मिले जो नैन उनसे तो Er. Rajan Soni

 

मिले जो नैन उनसे तो, बगावत कर ही बैठे हैं,

मिले वो हमसे तो शिकायत कर ही बैठे हैं।
न जाने क्या असर है उनकी एक मुस्कान का,
हम अपने दिल से उनकी वकालत कर ही बैठे हैं।

निगाहें जब मिलीं उनसे, तो दिल का हाल खुलने लगा,
छुपाया था जिसे बरसों, वही एहसास खिलने लगा।
वो पूछते रहे हमसे, “क्यों इतने खामोश रहते हो?”
हम उनकी एक अदा पर ही, मोहब्बत कर ही बैठे हैं।

हमें मालूम था मुश्किल है राह-ए-इश्क़ में चलना,
मगर उनके लिए हर दर्द भी मंजूर था सहना।
वो मिले तो जिंदगी को एक नया मतलब मिला,
हम अपनी हर खुशी उनकी बदौलत कर ही बैठे हैं।

इंजीनियर राजन सोनी

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